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Amicus curiae
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अमिकस क्यूरी (Amicus curiae), या 'न्यायालय का मित्र', तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का एक असामान्य रूप है, जो मुख्य रूप से नागरिक प्रक्रियात्मक और संवैधानिक कानून से संबंधित है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायिक बहस का लोकतंत्रीकरण करना और सामाजिक प्रभाव वाले मामलों में न्यायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए विशेष तकनीकी, तथ्यात्मक या कानूनी इनपुट प्रदान करना है।

अवधारणा और आधार

अमिकस क्यूरी की संस्था पारंपरिक तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से कहीं आगे जाती है। जहाँ पारंपरिक हस्तक्षेप का उद्देश्य अपने स्वयं के कानूनी हितों की रक्षा करना होता है, वहीं अमिकस क्यूरी न्यायपालिका के सहयोगी के रूप में कार्य करता है। इसकी कानूनी प्रकृति एक असामान्य हस्तक्षेप की है, जो बहुलवादी और लोकतांत्रिक है, जिससे पर्याप्त प्रतिनिधित्व और विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्ति उन मुद्दों पर न्यायाधीश या न्यायाधिकरण की राय बनाने में योगदान दे सकते हैं जो मूल पक्षों के व्यक्तिपरक हितों से परे हैं।

फ्रेडी डिडियर जूनियर और लुइज़ गुइलहर्म मारिनोनी जैसे लेखकों के नेतृत्व में आधुनिक सिद्धांत ने इस समझ को मजबूत किया है कि अमिकस क्यूरी को स्वीकार करने से हस्तक्षेपकर्ता को पक्षकार का दर्जा नहीं मिलता, बल्कि वह न्यायाधिकरण के एक सहायक के रूप में कार्य करता है, जिसका उद्देश्य पर्याप्त विरोधाभासी बहस (substantial adversarial) के विस्तार के माध्यम से न्यायिक निर्णय को लोकतांत्रिक वैधता प्रदान करना है।

ऐतिहासिक उत्पत्ति और विकास

इस संस्था की उत्पत्ति रोमन कानून में हुई थी, जो बाद में कॉमन लॉ प्रणाली, विशेष रूप से एंग्लो-सैक्सन कानून में मजबूत हुई, जहाँ अमिकस क्यूरी की भूमिका तीसरे पक्ष को कानून के बिंदुओं पर निष्पक्ष जानकारी प्रदान करने की अनुमति देती थी। ब्राजीलियाई कानूनी प्रणाली में, इस संस्था ने 1999 के कानून संख्या 9.868 के साथ आधुनिक रूप लिया, जो असंवैधानिकता की प्रत्यक्ष कार्रवाई (ADI) और संवैधानिकता की घोषणात्मक कार्रवाई (ADC) की प्रक्रिया और निर्णय से संबंधित है। 2015 की नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC/15) में इसे सामूहिक महत्व के मामलों में प्रक्रियात्मक प्रबंधन के एक उपकरण के रूप में स्थापित किया गया।

कानूनी प्रावधान और प्रक्रियात्मक ढांचा

वर्तमान नागरिक प्रक्रिया संहिता ने CPC/2015 के अनुच्छेद 138 से 138-A में इस संस्था को मान्यता दी है। यह प्रावधान प्रवेश के लिए संचयी आवश्यकताओं को निर्धारित करता है: मामले की प्रासंगिकता, विवाद के विषय की विशिष्टता या विवाद का सामाजिक प्रभाव। प्रवेश को स्वीकार करने वाला निर्णय अंतिम होता है, हालांकि सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस (STJ) द्वारा स्थापित समझ के अनुसार, अस्वीकृति के मामले में आंतरिक अपील (agravo interno) की संभावना बनी रहती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग और न्यायशास्त्र

सुपीरियर कोर्ट, विशेष रूप से सुप्रीम फेडरल कोर्ट (STF) के न्यायशास्त्र ने इस संस्था को व्यापक व्याख्या दी है। संवैधानिक नियंत्रण के दायरे में, STF अपने आंतरिक नियमों (अनुच्छेद 7, § 2) के माध्यम से उन संस्थाओं के हस्तक्षेप को स्वीकार करता है जो पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदर्शित करती हैं। हाल ही में, STF ने अमिकस क्यूरी की भूमिका को सीमित करने के लिए कदम उठाए हैं ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके, और यह अनिवार्य किया है कि आवेदक मामले के विषय के साथ अपनी प्रासंगिकता साबित करे, अन्यथा पर्याप्त वैधता की कमी के कारण इसे अस्वीकार कर दिया जाएगा।

सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस (STJ) में, CPC के अनुच्छेद 138 का अनुप्रयोग अक्सर दोहराव वाले विशेष अपीलों (Repetitive Theme) के निर्णयों में किया जाता है, जहाँ बाध्यकारी मिसालों के दायरे को परिभाषित करने के लिए क्षेत्रीय संस्थाओं की उपस्थिति मौलिक होती है।

संबंधित सिद्धांत और सैद्धांतिक मतभेद

यह संस्था अनिवार्य रूप से पर्याप्त विरोधाभासी बहस और प्रक्रियात्मक सहयोग के सिद्धांत से जुड़ी है। सैद्धांतिक मतभेद मुख्य रूप से अमिकस क्यूरी की प्रक्रियात्मक शक्तियों के विस्तार पर केंद्रित हैं। जहाँ सिद्धांत का एक हिस्सा अपील दायर करने की संभावना का समर्थन करता है (जैसे स्पष्टीकरण के लिए एम्बार्गो), वहीं दूसरा, अधिक प्रतिबंधात्मक वर्ग का तर्क है कि भूमिका केवल मेमोरियल प्रस्तुत करने और मौखिक बहस तक सीमित होनी चाहिए, अन्यथा यह हथियारों की समानता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों को कमजोर कर सकता है।

समकालीन प्रासंगिकता और प्रभाव

राजनीति के न्यायिककरण और बाध्यकारी निर्णयों (मिसालों) के प्रसार के परिदृश्य में, अमिकस क्यूरी लोकतांत्रिक कमी के लिए एक सुरक्षा वाल्व के रूप में कार्य करता है। यह संगठित नागरिक समाज, वर्ग संघों और अनुसंधान संस्थानों को प्रक्रिया में ऐसे तकनीकी तत्व शामिल करने की अनुमति देता है जिन्हें पारंपरिक साक्ष्य माध्यमों से एकत्र नहीं किया जा सकता था, जिससे अंतिम न्यायिक निर्णय को अधिक तर्कपूर्ण घनत्व और लोकतांत्रिक वैधता मिलती है।

कानूनी और न्यायशास्त्रीय संदर्भ

  • ब्राजील के संघीय गणराज्य का संविधान 1988, अनुच्छेद 103, § 2।
  • कानून संख्या 13.105/2015 (नागरिक प्रक्रिया संहिता), अनुच्छेद 138 और 138-A।
  • कानून संख्या 9.868/1999 (ADI और ADC की प्रक्रिया और निर्णय), अनुच्छेद 7, § 2।
  • STF, ADI 3.460/DF, रिपोर्टर मिन. गिल्मर मेंडेस: अमिकस क्यूरी के प्रवेश के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की आवश्यकता का समेकन।
  • STJ, विशेष न्यायालय, AgInt no REsp 1.846.126/SP: अमिकस क्यूरी को स्वीकार करने वाले निर्णय की अंतिम प्रकृति पर समझ।
  • सुप्रीम फेडरल कोर्ट के आंतरिक नियम, अनुच्छेद 7, § 2।

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