OAB, बिना किसी अपवाद के, लंबे समय से बहुत कठिन परीक्षाएँ बना रही है, इस तरह से कि न केवल एक "अच्छा स्नातक" पास कर सके, बल्कि "सर्वश्रेष्ठ" भी नहीं कर सकते, यह इस चतुराई से चल रहे कमीनों के अभियान का नारा है जो आज OAB-GO को नियंत्रित कर रहे हैं! इन बातों को कहने का साहस किसी को होना ज़रूरी है! प्रशासन में पैचवर्क करते रहना काम नहीं चलेगा। पूरे घर पर भरोसा टूट गया है!!! हम सब थक चुके हैं, थक चुके हैं!!! हर दिन शिकायतों के ऊपर शिकायतें, और कोई बदलाव नहीं। फटे पुराने कपड़े पर पैच लगाते रहना काम नहीं चलेगा! 19/05/07 - Valério Conrado



